दुगर्म पैदल मार्ग और मंजिल तक पहुंचने का जज्बा,स्वच्छ हिमालय का संदेश देने 4600 मीटर की ऊंचाई पर साइकिल से पहुंचे सोमेश

उत्तराखंड में  पहाड़ों पर ट्रेकिंग करना आसान काम तो नहीं लेकिन अगर हौसला कुछ कर दिखाने का हो तो सफर आसान हो जाते है। रास्ते जब दुर्गम हो और हाथ में साइकिल तो आप सोच सकते है कि किस तरह उसे पार कर मंजिल तक पहुंचा जाएगा। खतरनाक रास्ते, पहाड़ी ढलान, बड़े-बड़े बोल्डरों को पार करते हुए पहाड़ पर साइकिल चढ़ाना खतरनाक तो है, लेकिन साहसिक व रोमांचकारी भी है। ये कारनामा कर दिखाया है पांडुकेश्वर निवासी सोमेश पंवार ने…।

जी हां सोमेश ने स्वच्छ हिमालय का संदेश देने और कोरोना से विश्व को मुक्ति की कामना के उद्देश्य से बेहद खतरनाक सतोपंथ का सफर कर वापस लौटे है। सोमेश ने साइकिल से अति दुर्गम पैदल मार्ग पर यात्रा कर4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंथ की सफल यात्रा की है। माना जाता है कि इस झील के तीनों कोनों में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। एकादशी के दिन त्रिदेव यहां स्नान करते हैं। इस दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आपको बता दें कि ये पहली बार हुआ है जब साइकिल से कोई व्यक्ति सतोपंथ पहुंचा है। सोमेश ने बदरीनाथ से सतोपंथ तक 50 किमी की यात्रा पांच दिन में पूरी की।  बदरीनाथ से 25 किमी दूर सतोपंथ में प्राकृतिक झील के साथ ही हिमालय की सुंदरता श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। सबसे कठिन ट्रेक में शुमार इस ट्रेक पर अब धीरे-धीरे स्थानीय ट्रेकर और लोग यहां पहुंचने लगे हैं। समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंथ ताल का सफर माणा से होकर गुजरता है।

 

 

 

+