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मिसालः कोरोना में गई नरेंद्र की नौकरी तो गांव में शुरू कर दी फूलो की खेती, आज कमा रहे लाखों रूपए…

कोरोना ने जहां कई लोगों के घरों को उजाड़ दिया , हजारो लोग बेरोजगार हो गए वहीं कुछ लोगों ने इस महामारी को अवसर बना मिसाल कायम कर रहे है। अपने जज्बे और हौसले के दम पर कामयाबी की सीढियां चढ़ रहे है। आज हम बात कर रहे अल्मोड़ा के नरेंद्र सिंह बिष्ट की। जिनकी कोरोना महामारी के दौर में जब नौकरी छिन गई तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक नई शुरूआत की। गांव में आकर नरेंद्र लिलियम की खेती  करने में जुट गए और आज  इससे  लाखों रूपए कमा रहे है। उनके जज्बे की हर कोई सराहना कर रहा है।

आपको बता दें कि जिस वक्त कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे थे। कई लोग मौत को गले लगा रहे थे तब शीतलाखेत नौला गांव निवासी नरेंद्र कामयाबी की नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहे थे। पिथौरागढ़ में वन विभाग में संविदा पर तैनात नरेंद्र की पिछले साल लॉकडाउन में नौकरी चली गई तब उन्होंने गांव लौट अपना कारोबार करने की सोची । फिर उनके दिमाग में गांव में हॉलैंड के लिलियम फूल की खेती करने का आइडिया आया। उन्हें पता चला कि हर बड़े सेमिनार में मंचों और सभागारों की सजावट में लिलियम का खूब इस्तेमाल होता है। बस फिर क्या था नरेंद्र ने गांव में लिलियम के फूल उगाने की जिद पकड़ ली। नरेंद्र का जज्बा देख उद्यान विभाग ने भी मदद की।

नरेंद्र ने एक नाली भूखंड में सौ वर्ग मीटर के दो पॉलीहाउस लगवाए। प्रयोग के तौर पर भीमताल से एशियाटिक प्रजाति के लिलियम बल्ब मंगाए। जून के आखिर में बल्ब लगाए गए और नवंबर की शुरुआत में फूल बिक्री के लिए तैयार हो गए। पिछले सीजन में नरेंद्र ने 2000 बल्ब लगाए थे। एक बल्ब पर 15 रुपये का खर्च आया, वहीं उन्हें कुल 1.20 लाख रुपये की आय हुई।

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