अगर आप भी मोबाइल से करते है बीपी-शुगर की जांच , तो हो जाए सावधान,वरना बैंक खाता हो जाएगा खाली

अगर आप भी घर बैठे मोबाइल से बीपी शुगर जैसी जांच करते है तो आप बड़ी ठगी का शिकार  हो सकते है। आपको सावधानी बरतने की जरूरत है।  कोरोना महामारी में जब सब घर में है। ऑनलाइन व्यापार से लेकर हर काम हो रहा है। तो अपराधी भी दो कदम आगे चल रहे है। साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साइबर ठग पहले फेक आईडी बनाकर चूना लगा रहे थे फिर उन्होंने कोरोना के नाम पर मदद के लिए गुहार लगाई और खाते खाली कर दिए। इतना ही नहीं ठगों ने फ्री में कोविड टेस्ट करवाने और वैक्सीन पंजीकरण के नाम पर लोगों को चूना लगाया। अब बीपी, ऑक्सीजन लेवल और शुगर मापने के एप डाउनलोड करवाने के बहाने ठगी कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों को आगाह करने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी की है।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी के इस दौर में ऑक्सीमीटर, शुगर, बीपी की जांच करने वाले उपकरणों की मांग बढ़ी है। होम क्वारंटीन मरीज इसे खरीद रहे हैं। उसे देखते हुए इंटरनेट पर साइबर ठग सक्रिय हैं। साइबर अपराधी जालसाजी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। ऑक्सीमीटर से मिलते जुलते एप डाउनलोड करने के बाद उसे एक्टीवेट करने के लिए साइबर ठग फिंगरप्रिंट मांगते हैं। इससे बायोमीट्रिक डेटा ठगों के पास पहुंच जाता है। इसमें व्यक्तिगत फोटो और डेटा चोरी होने का भी खतरा है। क्योंकि यह इंस्टालेशन के दौरान स्टोरेज और गैलरी की अनुमति मांगता है। उंगली बॉयोमेट्रिक्स के लिए रखते ही डेटा लीक होने लगता है।

इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग बड़ी सावधानी से करने की जरूरत है। साइबर एक्सपर्ट  कहते है कि ठगी से बचने के लिए फोन में सीमित एप ही डाउनलोड करें । कोई भी एप डाउनलोड करने से पहले एप की रेटिंग, कितने यूजर हैं, इसे जरूर चेक करें। रेटिंग और यूजर के जरिये पता लग सकता है कि एप सेफ है या नहीं। कमेंट सेक्शन में लोगों द्वारा दिए गए फीडबैक की जांच कर लें। हाई रेटिंग एप जिनकी रेटिंग 3 प्लस हो, उसी एप को तरजीह दें। सोशल मीडिया पर एडवरटाइजमेंट वाले एप डाउनलोड न करें। इससे आप बच सकते है।

 

 

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