मुस्लिम देश के समुद्र में मिला 2000 साल पुराना मंदिर…..  

साथियों, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हमारा देश धर्म और आस्था रखने वाले लोगों का देश है। हमारे देश में आपको ऐसे अनगिनत मंदिर मिल जाएंगे जो अपने रहस्यों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो हमारे देश में नहीं बल्कि एक मुस्लिम देश में है।

बता दें कि मुस्लिम देश में मंदिर मिलना बहुत ही आश्चर्यजनक बात है और वहां न केवल मंदिर मिला है बल्कि मंदिर के साथ एक प्राचीन मूर्ति भी मिली है जो स्वयं भगवान नटराज यानि भगवान शिव की है! तो आइए आज हम आप लोगों को ऐसे ही एक मंदिर के रहस्यों से रूबरू कराते हैं। जिसके बारे में जानकर आप लोग भी सोचने लगेंगे।

 दरअसल, मिस्र का सबसे पुराना शहर हेराक्लियान है, जिसके समुद्र में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने 2200 साल पुराने मंदिर की खोज की है!

अधिकारियों के अनुसार यह एक ग्रीक मंदिर है जो समुद्र की गहराई में बिखरा हुआ पाया गया था। तलाशी के दौरान समुद्र में इस मंदिर के खंभों के साथ-साथ कई तरह के आभूषण और कुछ मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं। लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस मंदिर के पास से नटराज के रूप में भगवान शिव की एक पत्थर की मूर्ति मिली है। इस संबंध में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस उत्तरी क्षेत्र में यह मंदिर मिला है उसे मिस्र यानि अटलांटिस कहते हैं! भले ही इस समय मिस्र एक मुस्लिम देश है, लेकिन हजारों साल पहले मिस्र को मंदिरों की भूमि के रूप में जाना जाता था! आपको बता दें कि इस मंदिर के अंदर कुछ तांबे के सिक्के और तरह-तरह के गहने मिले हैं जिन्हें देखकर ही पता चलता है कि ये चीजें हजारों साल पुरानी हैं।

 आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस मंदिर का निर्माण तीसरी या चौथी शताब्दी में हुआ था जिसके बाद यह समुद्र में डूब गया था!

इस मंदिर के साथ-साथ कुछ नावें भी डूब गईं, जिनमें से कुछ तांबे के सिक्के हैं जो राजा क्लारेडियस टॉलेमी दुती के शासनकाल के हैं! हरकालियन शहर को शुरू से ही मंदिरों का शहर माना जाता था लेकिन सवाल उठता है कि क्या उस समय वहां भगवान शिव की पूजा की जाती थी या ग्रीक मंदिरों में की जाती थी! क्योंकि समुद्र के तल पर इस मंदिर के साथ भगवान शिव की उपस्थिति बहुत ही आश्चर्यजनक है! अधिकारियों ने कहा कि उन्हें प्रतिमा के साथ कुछ हथियार, प्राचीन सिक्के, आभूषण और बर्तन मिले हैं।

उस समय के राजा टॉलेमी न केवल एक कुशल राजा थे बल्कि एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री भी थे! उसने मिस्र के कैलेंडर के लिए समय निर्धारित किया, वह समय जो चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में लगता है! राजा टॉलेमी भूगोल और विज्ञान के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रकाश के लिए कई सिद्धांत भी बनाए! लेकिन यह शहर जल्द ही पूरी तरह से एक खाड़ी में डूब गया! लेकिन आज भी वैज्ञानिकों के लिए यह रहस्य बना हुआ है कि भगवान शिव की यह मूर्ति यहां कैसे आई, क्या उस समय मिस्र में भगवान शिव की पूजा की जाती थी या यह मूर्ति उन्हें किसी हिंदू ने दी थी। इस जानकारी पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? दोस्तों और भी रोचक और ताजा खबरों के लिए आप हमारे पेज से जुड़ सकते हैं और अपने दोस्तों को भी इस पेज से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

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