इंजीनियरिंग के उस्ताद थक-हारकर पहुंचे माता के दरबार, मां धारी देवी से लगाई गुहार , NH-58 का पूरा सच

 देवभूमि उत्तराखंड में पग-पग पर मंदिर हैं। यहां गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के रूप में चारधाम है।यहां देवी-देवताओं की विशेष मान्यता है। जब कोई बीमार होता है और डॉक्टरों के इलाज से भी ठीक नहीं होता तो भगवान की पूजा (देवता नाचाए जाते हैं) की जाती है. उस पूजा में नाचने वाले को डंगरिया (उस शख्स पर देवी या देवता आते हैं) कहा जाता। डंगरिया बताता है कि मरीज को क्या दिक्कत है और क्यों है। उसी अनुसार घर के लोग फिर आगे का कार्यक्रम करते हैं। लेकिन इस बार इंजिनियरिंग के उस्ताद थक गए है। और वह धारी देवी के दरबार में पहुंचे है।

बता दें कि नरकोटा में कई दिन तक पहाड़ी से मलबा आकर सड़क बंद हो जा रही थी. मजदूर जैसे ही सफाई करते फिर से मलबा आकर सड़क ब्लॉक कर देता. इसके बाद इंजीनियर साहब को मां धारी देवी की ही याद आई। बारिश से बार-बार हो रहे भूस्खलन से परेशान इंजीनियर साहब मां धारी देवी की शरण में गए तो विभाग के कर्मी मलबा हटाने के काम में जुटे हुए हैं। यहां करीब 30 मीटर लंबा हिस्सा नदी में समा गया। सड़क खोलने में कई दिन लग सकते हैं. इस कारण रुद्रप्रयाग से आने वाले वाहनों को तिलवाड़ा-घनसाली-कीर्तिनगर से ऋषिकेश भेजा जा रहा है।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीएल मिश्रा धारी देवी मंदिर पहुंचे। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की। मां धारी देवी को प्रसाद चढ़ायावह सड़क के बार बार  संभवत: इसी मान्यता के अनुसार बार-बार सड़क ब्लॉक होने से परेशान अधिशासी अभियंता बीएल मिश्रा ने मां धारी देवी की शरण ली। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रसाद चढ़ाया।  बता दें कि ये पहली बार नहीं हुआ है जब कोई अधिकारी भगवान की शरण में पहुंचा हो। इससे पहले तोता घाटी के कंटिग के समय और कई साल पहले सिरोबगड़ पर ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन के कारण नासूर बन गया था. बीआरओ इंजीनियरों ने भी हार मानकर भगवान शिव की शरण ली थी. भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी।

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