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देवभूमि का यह अमृत सा स्वाद “सेहत के लिए खजाने से कम नहीं” गडेरी (पिनालू) आता है काम कई बीमारियों के इलाज में

पहाड़ की संस्कृति के बारे में तो आप सभी लोगों को अच्छे से पता होगा और हमारा पहाड़ अपने रीति रिवाज मंदिर और यहां की सभ्यता के लिए पूरे वर्ष में प्रसिद्ध है साथ ही साथ हमारे उत्तराखंड के खास पहाड़ी सब्जी और फल को लेकर हमेशा लोगों में उत्साह बना रहता है क्योंकि यहां के फल और सब्जियों में अलग प्रकार का स्वाद देखने को मिलता है जिसके लिए लोग दीवाने होते हैं और हमेशा उसके स्वाद को चखने के लिए आतुर रहते हैं आजम आप सभी लोगों को बताने वाले हैं पिनालू के नाम से जाने जाने वाली एक सब्जी के बारे में जिसे आम लोग अरबी के नाम से जानते हैं। जिसने ठंड के मौसम में आते हैं और ठंड के मौसम में इसकी खरीद काफी बढ़ जाती है क्योंकि यह गर्म बताई जाती है और साथ ही साथ इसके स्वाद के लिए लोग दीवाने रहते हैं और एक शोध में तो यहां पता चला है कि यह बीमारियों के लिए भी काफी कारगर साबित होती है।

एक शोध में पता चला है कि इसमें न केवल पर्याप्त मात्रा में आयरन मौजूद है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट और खून को साफ करने वाले तत्व भी हैं. आप जानते ही होंगे कि आयरन तत्व न होने से एनीमिया, सिरदर्द या चक्कर आना, हीमोग्लोबिन बनने में परेशानी होना जैसी परेशानियां शरीर को पस्त कर देती हैं. इसके अलावा एंटीऑक्सिडेंट अक्‍सर अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य और बीमारियों को रोकने का काम करते है. कैंसर से बचाने, आंखों की रोशनी के लिए, मजबूत लिवर के लिए एंटी ऑक्सीडेंट शानदार चीज है. साथ ही इसमें मौजूद फाइबर्स मेटाबालिज्म को सक्रिय बनाते हैं जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए भी यह लाभदायक है.

पिनालू बरसात के तुरंत बाद खाने के लिए तैयार होता है और बसंत की शुरुआत तक आसानी से उपलब्ध होता है. गडेरी की सब्जी पहाड़ में जाड़ों भर खाई जाती है. गडेरी की सब्जी का उत्पादन पहाड़ के लगभग सभी जिलों में किया जा रहा है. जिसमें चंपावत और टिहरी में इसका उत्पादन सबसे ज्यादा हो रहा है. इसके अतिरिक्त बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल आदि जिलों में भी किसान व बागवान गडेरी को उगा रहे हैं. मंडी में रोजाना करीब 7 से 8 कुंतल गडेरी सब्जी पहुंच रही है, डिमांड अधिक होने के चलते हाथों-हाथ बिक्री होती है.

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