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जल्द शुरू हो सकती है उत्तराखंड में “बारहमासी यात्रा”, श्रद्धालु शीतकालीन के दौरान भी कर सकेंगे धामों के दर्शन………….

यह बात तो आप सभी लोगों को पता है कि उत्तराखंड अपने धार्मिक मान्यताओं के कारण पूरे विश्व में कितना ज्यादा प्रसिद्ध है और यहां पर हर वर्ष लाखों से भी ज्यादा श्रद्धालु चार धाम के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामना भगवान से करते हैं लेकिन पहले ऐसा देखा जाता था कि शीतकालीन मौसम के दौरान भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर पाते थे जिसके कारण उनके मन में मलाल रहता था कि वहां शीतकालीन के दौरान भगवान के दर्शन नहीं कर पाएंगे क्योंकि ठंड ज्यादा होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जाना दुबर हो जाता है लेकिन सरकार ने इसका एक खोज निकाला है इसके बारे में उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां कई मंदिर हैं जो राज्यों के इतिहास को छुपाते हैं। इसमें पंच बद्री, पंच प्रयाग और पंच केदार शामिल हैं, हर गांव, ब्लॉक और जिले में प्राचीन धार्मिक स्थल हैं। चारधाम यात्रा के लिए हर साल अप्रैल से नवंबर तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। लेकिन इन मंदिरों के बारे में कोई नहीं जानता। इसके बाद सर्दियों में यात्रा पूरी तरह से बंद हो जाती है। देवस्थानम बोर्ड अब पूरे साल के लिए यात्रा योजना तैयार कर रहा है।

चारधाम के अधीनस्थ मंदिरों सहित अन्य मठों और तीर्थस्थलों सहित शीतकालीन आसन स्थल को शीतकालीन यात्रा से जोड़ा जाएगा। अब गर्मियों में चारधाम यात्रा होगी जबकि सर्दियों में भी तीर्थयात्री मौज-मस्ती कर सकते हैं और इन स्थानों की यात्रा कर सकते हैं। सब कुछ ठीक रहा तो चारधाम के कपाट बंद होने के बाद इस साल नवंबर या दिसंबर के पहले सप्ताह से ओंकोरेश्वर मंदिर, ऊखीमठ, नरसिंह मंदिर जोशीमठ, मुखबा उत्तरकाशी से विभिन्न शीतकालीन यात्राएं शुरू की जाएंगी|

रुद्रप्रयाग जिले में विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, कालीमठ, त्रियुगीनारायण, कार्तिक स्वामी, मां ललिता माई त्रिपुरा सुंदरी, वाराही मंदिर, फलासी तुंगनाथ मंदिर, नारी मंदिर, कोटेश्वर, चौमुंडा मंदिर संगम, चंडिका मंदिर महाड, कार्तिक स्वामी प्रमुख प्राचीन मठ हैं। इनमें से अधिकतर मंदिर केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हैं। ऐसे में प्रदेश और देश के श्रद्धालु सर्दियों में इन धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकेंगे| बोर्ड के इस अभियान से पहाड़ में बारामसी तीर्थ के विकास के साथ-साथ धार्मिक स्थलों तक आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाने में भी मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा|

उत्तराखंड चारधाम देवस्थान बोर्ड के सदस्य श्रीनिवास पोस्ती ने बताया कि उत्तराखंड में बारामसी तीर्थ को विकसित करने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। आगामी बैठक में चारधाम शीतकालीन सीट सहित अन्य अधीनस्थ मंदिरों को जोड़ने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही पर्यटन एवं बंदोबस्ती संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज से बात कर यात्रा की भावी रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी| अधीनस्थ मंदिरों में मूलभूत यात्री सुविधाएं जुटाने का काम भी किया जाएगा।

25 नवंबर 2015 को कांग्रेस सरकार ने शीतकालीन यात्रा की नींव रखी थी। 25 नवंबर को तत्कालीन शिक्षा मंत्री प्रसाद नैथानी ने केदारनाथ की शीतकालीन सीट ऊखीमठ और दूसरे केदार मदमहेश्वर मंदिर में शीतकालीन यात्रा शुरू की थी. नवंबर 2015 से अप्रैल 2016 तक लगभग 11,000 भक्तों ने ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन किए। लेकिन बाद के वर्षों में सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया।

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