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उत्तराखंड में आई आपदा के दौरान देवदूत बनकर आए सेना के जवान करीब 300 से ज्यादा लोगों की बचाई जान…………..

अभी कुछ दिनों पहले की बात है कि प्रदेश में 2 दिन तक काफी तेज बारिश देखी गई थी और आपदा में लगभग 45 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवा दी थी सैलाब और मलबे में कई जिंदगियों को लील लिया और उनसे उनके जीने का हक छीन लिया हालात जब बेकाबू होने लगे तो सेना के जवान मानो देवदूत बनकर उत्तराखंड के वासियों की रक्षा के लिए आए और उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए इन जवानों की बदौलत सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचा दी गई और उन्हें उनका जीवन वापस मिल गया। जवानों ने एक बार फिर बता दिया कि एक फौजी हमेशा अपना करते हुए निभाता है चाहे वक्त और मंदिर कैसा भी हो वहां अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं आता और हमेशा अपने जान की बाजी लगाकर अपना हर कार्य करता है।

कुमाऊं में भी सेना के जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। यहां नैनीताल में सेना की टुकड़ी ने 6 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 30 लोगों को बचाया। टनकपुर में सेना की मदद से 283 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इनमें 55 बच्चे भी शामिल थे।
18 अक्टूबर को भारी बारिश के चलते नैनीताल झील ओवरफ्लो हो गई। इससे तल्लीताल के लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया। झील ओवरफ्लो होने के कारण कई दुकानदार भी फंस गए। तब जिला प्रशासन के अनुरोध पर पंचशूल ब्रिगेड की टुकड़ी को मदद के लिए भेजा गया। इस टीम ने छह घंटे के रेस्क्यू के बाद 30 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। टनकपुर के अंबेडकर गांव में सेना की टुकड़ियों ने 283 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इसी तरह कोसी नदी के तेज बहाव के बीच फंसे वन ग्राम सुंदरखाल के लोगों को बचाने के लिए सेना के जवानों ने हेलीकॉप्टर की मदद ली। यहां हेलीकॉप्टर से 25 ग्रामीणों को बचाया गया, जबकि छह लोगों को राफ्ट की मदद से निकाला गया। सोशल मीडिया पर रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। लोग सेना के जज्बे और सेवाभाव की तारीफ कर रहे हैं, दूसरों की जान बचाने वाले फौजियों को सैल्यूट कर रहे हैं।

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